Hindi Shayari - Poetry In Hindi

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Mir Taqi Mir Ghazal Shayari Hindi – Apne Tadapne Ki Mai Tadbir Pehle Kar Lu

अपने तड़पने की मैं तदबीर पहले कर लूँ
तब फ़िक्र मैं करूँगा ज़ख़्मों को भी रफू का।

यह ऐश के नहीं हैं या रंग और कुछ है
हर गुल है इस चमन में साग़र भरा लहू का।

बुलबुल ग़ज़ल सराई आगे हमारे मत कर
सब हमसे सीखते हैं, अंदाज़ गुफ़्तगू का।

-Mir Taqi Mir


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