Hindi Shayari - Poetry In Hindi

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Mir Taqi Mir Ghazal Shayari Hindi – Na Socha Na Samjha Na Sikha Na Jana

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया ख़ुदबख़ुद दिल लगाना

ज़रा देख कर अपना जल्वा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाये ज़माना

ज़ुबाँ पर लगी हैं वफ़ाओं कि मुहरें
ख़मोशी मेरी कह रही है फ़साना

गुलों तक लगायी तो आसाँ है लेकिन
है दुशवार काँटों से दामन बचाना

करो लाख तुम मातम-ए-नौजवानी
प ‘मीर’ अब नहीं आयेगा वोह ज़माना

-Mir Taqi Mir


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