Mohabbat Shayari – इंकार जैसी लज़्जत

इंकार जैसी लज़्जत…
इक़रार में कहां…

ना.. ना.. में छुपी हो जब मोहब्बत…
फिर हाँ.. हाँ.. मे वो बात कहाँ….




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